बुधवार, 4 अगस्त 2010
यादों की सौगात
बीत गई सारी जिन्दगी जुदाईयों में
तुझे भूलना चाहा और शायद भुला भी दिया
पर तू ही याद आया अकसर तनहायिओं में ।
ज़िन्दगी बहुत पीछे छूट गई,
हम बहुत आगे निकल आए
पर पन्ने पलट कर देखा जो इक रोज़
तेरा ही नाम लिखा था बेवफाईयों में ।।
यूं ही चलते-चलते,
साया तक साथ छोड़ गया
कोई ना रहा अपना ।
पर इक दिन देखा जो दर्दे जिगर में,
तू ही नज़र आया,दिल की गहराईयों में ।।
गुरुवार, 15 जुलाई 2010
भारत की राजकीय मुद्रा

आज का दिन निश्चय ही राजभाषा के लिए भी अच्छी खबर लेकर आया है। रूपए के संकेतक में देवनागरी को यथास्थान देना निश्चिय ही राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक है। राजभाषा ने अपने लंबे समय में इस प्रकार के बहुत ही कम दिन देखे हैं जब उसे मस्तक पर बिठाया गया हालांकि रोमन के संकेतक का इसमें उल्लेख है परंतु मुख्य दृष्टि में देवनागरी का र ज्यादा दिखाई दे रहा है। सभी राजभाषा प्रेमियों के लिए यह विषय प्रसन्नता का है क्योंकि अब विश्व के प्रत्येक देश में हमारी देवनागरी लिपि का भी डंका बज गया है। कैबिनेट का यह फैसला स्वागत योग्य है। कितना ही अच्छा हो जब कैबिनेट ऐसे और प्रेरणीय कार्य करे जिससे राजभाषा का स्थान हमेशा शीर्ष पर रहे। श्री डी उदय कुमार को भी कोटि कोटि धन्यवाद जिन्होंने देवनागरी लिपि का प्रयोग कर ऐसा सुंदर संकेतक तैयार किया।
हालांकि राजभाषा के विकास के लिए तो अभी बहुत से प्रयास किए जाने शेष है लेकिन आज केवल हम इस बात को लेकर प्रसन्न रहें कि देर से सही हमारी आर्थिक शक्ति की पहचान में देश की भाषा विद्यमान है।
राजभाषा तेरी यूं ही हमेशा शान बनी रहे
तू हमेशा मेरा देश का अभिमान बनी रहे
तू यूं ही यश की प्राप्ति करे
आगे बढती रहे, बढती रहे
जय हिंदी
गुरुवार, 24 जून 2010
बरसात
मेरे तन पर
जब पड़ी
तो दिल की धडकनें
तेज हो गईं
और
मन में
एक बार
फिर
डर घर
करने लगा
कि इस
बार भी बाढ
का प्रकोप
कई जानें
लेने जरूर आएगा।
गरीब की
छत फिर जाएगी
अमीर की जेब
फिर राहत
के पैसे से
भर जाएगी।।
गुरुवार, 17 जून 2010
देश की माटी फिर पुकारे
देश की माटी फिर पुकारे
मेरे सपूतो वापिस आओ।
लाखों की शहादत को न तुम
इस तरह से व्यर्थ गंवाओं।।
मत सोचो कि अहिंसा की बात कहने
अब फिर कोई गांधी आएगा।
न इंकलाबी ख्यालात लेकर कोई,
भगतसिंह सी शहादत दोहराएगा।
60 वर्षों में जो कुछ पाया,
उसपे न तुम गुमान करो
इतना कुछ खोया है हमने,
न अब किसी का गुणगान करो।
शिक्षा, भाषा, रोजगार, स्वास्थ्य,
बिकता यहां अब पानी है।
जहर भर दिया पूंजी के लुटेरों ने ,
गरीब की कहां बदली कहानी है।
विभाजन, युद्ध, भाषाविरोध, आपातकाल, गैसत्रासदी, दंगे
क्या यही विकास की कहानी है।
हमने इन कामों से अपने
इंसानियत को है शर्मसार किया।
मुझे बताओ देश में अब तक किसने,
इंसानियत का कोई काम किया।
देश में भिखारी, भूखे बच्चे, गलीकूचों में घूम रहे
गंदगी के सैलाब में अपने को दोजून का खाना ढूंढ रहे।
उठो अब संभलने का वक्त है
नहीं तो भविष्य दिखाएगा,
भटक के रास्ता कैसे मिटा देश एक
यह कहानी हर कोई बताएगा।
जय हिंदी जय भारत
सोमवार, 14 जून 2010
हमें माफ करना हिंदी भाषा
हमें माफ करना हिंदी भाषा,
तेरा कर्ज न हम चुका सके।
हो के स्वतंत्र तेरे सहारे से
सम्मान न हम तुझे दिला सके।
स्वतंत्रता के कर्णधारों ने तुझे,
रख संविधान में सम्मान दिया।
पर अंग्रेजों के पिछलग्गुओं ने
मिलकर अस्तित्व को तेरे मिटाने का प्रयास किया।
तूने सुदृढ़, कठोर,अविचल रहकर
नया सभी को है मुकाम दिया।
मिडिया, सिनेमा में रंग जमाकर,
नेताओं को भी बडा नाम दिया।
तेरे आगे जिनको झुकाना था मस्तक,
उन्होंने न कभी तेरा स्तुतिगान किया।
हमें माफ कर देना ऐ हिंदी भाषा तेरे लिए हमने न कुछ काम
बुधवार, 5 मई 2010
जय हिंद, जय भारत, जय हिंदुस्तान राजभाषा का करो सम्मान
सिहर उठता है मेरा मन हर बार, बार-बार।
अपनी भाषा बिन सूना लगे मुझे संसार
कैसे समझाऊं सबको करो अपनी भाषा से प्यार ।।
अपनी भाषा में बात करना क्यों परभाषा सा लगता है
कौन से शब्दों से जोश भरूं में अब
जब खून भी पानी सा लगता है ।
लौट आएंगें सभी ऐसी कोई आशा नहीं
कैसे समझाऊं सबको अपनी भाषा से बढकर होता कोई नहीं।।
कई फूलों को गूंथकर हमने भारत देश रूपी माला बनाई है
हमारी अलग-अलग भाषाएं हैं पर गर्व है हमने सभी अपनाई है।
कौन है ऐसा जिसने गुलामी की भाषा को अपनाया है
हम ही जिसने समस्त संसार को गले से लगाया है।।
परभाषा से प्यार करो पर अपनी भाषा का सम्मान करो
अनुरोध है आप सब देशवासियो से मेरी पीडा का समाधान करो।
तुम परभाषा के सुख लो लेकिन
शहीदों को तो याद करो
वो जानते थे तभी परभाषा का बहिष्कार किया
अरे! ये क्या, हमने तो जाने-अनजाने
अपनी भाषा का तिरस्कार किया ।।
सुबह को भूला शाम को लोट कर आए उसे भूला नहीं कहते
आहवान करता हूं देशवासियो अपनी भाषा में लोट आओ
छोड के मोह परभाषा का अपनी भाषा का गुणगान गाओ
आओ करे एकजुटता का एलान, मिलकर जोश से बोलें
जय हिंद,जय भारत और जय हिंदुस्तान।।
शुक्रवार, 4 दिसंबर 2009
दीदार
अनजाने में ही याद कर लिया करते हैं।
यूं तो सदियां गुज़र गईं तुझे देखे,
पर हर शब बंद आंखों से तेरा दीदार कर लिया करते हैं ।।