देश की माटी फिर पुकारे
मेरे सपूतो वापिस आओ।
लाखों की शहादत को न तुम
इस तरह से व्यर्थ गंवाओं।।
मत सोचो कि अहिंसा की बात कहने
अब फिर कोई गांधी आएगा।
न इंकलाबी ख्यालात लेकर कोई,
भगतसिंह सी शहादत दोहराएगा।
60 वर्षों में जो कुछ पाया,
उसपे न तुम गुमान करो
इतना कुछ खोया है हमने,
न अब किसी का गुणगान करो।
शिक्षा, भाषा, रोजगार, स्वास्थ्य,
बिकता यहां अब पानी है।
जहर भर दिया पूंजी के लुटेरों ने ,
गरीब की कहां बदली कहानी है।
विभाजन, युद्ध, भाषाविरोध, आपातकाल, गैसत्रासदी, दंगे
क्या यही विकास की कहानी है।
हमने इन कामों से अपने
इंसानियत को है शर्मसार किया।
मुझे बताओ देश में अब तक किसने,
इंसानियत का कोई काम किया।
देश में भिखारी, भूखे बच्चे, गलीकूचों में घूम रहे
गंदगी के सैलाब में अपने को दोजून का खाना ढूंढ रहे।
उठो अब संभलने का वक्त है
नहीं तो भविष्य दिखाएगा,
भटक के रास्ता कैसे मिटा देश एक
यह कहानी हर कोई बताएगा।
जय हिंदी जय भारत